धरती के ‘भगवान’ बने लुटेरेः इलाज की आड़ में वसूली का धंधा ! गायत्री अस्पताल ने मरीज को थमाया लंबा-चौड़ा बिल, बनाया बंधक, किडनी निकालकर बेचने की धमकी के इल्जाम…

संदीप सिंह ठाकुर, लोरमी। मुंगेली जिले के लोरमी नगर पंचायत क्षेत्र में निजी अस्पताल संचालकों की मनमानी नहीं रोकी जा सकती है. क्षेत्र में मासूम मरीजों की जान से खिलवाड़ करते हुए इलाज के नाम पर हजारों रुपये वसूले जा रहे हैं. साथ ही इलाज के नाम पर मरीज के परिजनों को जमकर लूटा जा रहा है. इतनी गंभीर समस्या पहले भी उठाई जा चुकी है। मरीज ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने बंधक बना लिया। इतना ही नहीं अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के पैसे न देने पर किडनी बेचने की धमकी भी दी।

आपको बता दें कि लोरमी के गायत्री अस्पताल से एक बेहद गंभीर समस्या सामने आई है. मामले में 24 वर्षीय पीड़िता खरगांव निवासी अजय मरावी ने अस्पताल प्रबंधन पर बंधक बनाने का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है. वहीं, युवक पीड़िता का आरोप है कि 9 अगस्त को पैर टूटने की शिकायत के बाद वह लोरमी के गायत्री निजी अस्पताल में इलाज के लिए गया था. उसके बाद अस्पताल के बोर्ड ने कहा कि सर्जरी के जरिए बोन ग्राफ्टिंग का खर्च 40,000 रुपये था. इसके बाद युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया और इलाज किया गया।

युवक ने इलाज के बाद 24 हजार रुपये अस्पताल भिजवाए। इसके बाद से ही युवक को अस्पताल प्रबंधन द्वारा बेरहमी से प्रताड़ित करने की बात कही जा रही है. जिन लोगों को धमकी दी गई है, उन्हें तब तक छुट्टी नहीं दी जाएगी जब तक कि 57 हजार रुपये की पूरी इलाज राशि का भुगतान नहीं किया जाता। इतना ही नहीं पीड़िता ने गायत्री अस्पताल के मैनेजर जितेंद्र साहू पर किडनी बेचने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया है. पीड़िता के खाते के मुताबिक, भुगतान न होने की स्थिति में प्रबंधक ने कई बार दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया. उसने कहा कि अगर वह भुगतान नहीं कर सका, तो वह डॉक्टर को किडनी बेच देगा।

वहीं, एसडीएम पार्वती पटेल के निर्देश पर नायब तहसीलदार के सहयोग से उक्त पीड़िता को गायत्री अस्पताल से सुरक्षित निकालकर लोरमी के सामुदायिक अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां से जांच के बाद उसे एंबुलेंस के जरिए घर छोड़ दिया गया।

इस मामले में नायब तहसीलदार राहुल कौशिक ने बताया, गायत्री अस्पताल में एक मरीज को बंधक बनाने की जानकारी के लिए जांच की गयी है. वह स्थान जहां उक्त बंधक मरीज को लोरमी के सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य जांच के बाद एंबुलेंस की मदद से छुड़ाया गया और घर लाया गया. साथ ही निंदा मिलने के बाद जांच के बाद कार्रवाई करने की बात कही.

निजी अस्पताल प्रबंधन की मनमानी से क्षेत्रवासी ऊबा हुआ

लोरमी तहसील के अंतर्गत कई जगह अवैध क्लीनिक व अस्पताल चल रहे हैं. जहां स्वास्थ्य विभाग किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं करता है। क्षेत्र के भोले-भाले मरीजों के इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूल की जा रही है. नर्सिंग होम एक्ट की अवहेलना करने के साथ ही सरकारी नियमों का पालन करते हुए अंधाधुंध तरीके से अस्पताल चलाया जा रहा है.

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